Brain mapping test
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श्रद्धा हत्याकांड में अफताब का होगा अब “ब्रेन मैपिंग टेस्ट”? जानिए क्या होता है “ब्रेन मैपिंग टेस्ट” एवं इसे कैसे किया जाता है?

श्रद्धा हत्याकांड के मामले में अभी तक आरोपी अफताब का पॉलीग्राफ टेस्ट के साथ-साथ नारको टेस्ट भी कराया गया जा चुका था। दोनों टेस्टों में कुछ अहम जानकारी हाथ आई है।

परंतु पुलिस आरोपी आफताब के खिलाफ एक मजबूत और पुख्ता सबूत इकट्ठा करने के लिए उसका ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की मांग की है।

पॉलीग्राफ टेस्ट में आरोपी के ब्लड प्रेशर एवं पल्स रेट को माफ कर और नारको टेस्ट में आरोपी को बेहोशी की अवस्था में लाकर उसे सवाल किए जाते हैं परंतु ब्रेन मैपिंग में मस्तिष्क की तरंग का विश्लेषण करके सच का पता लगाया जाता है।

आइए ब्रेन मैपिंग टेस्ट क्या है एवं यह काम कैसे करता है। इसमें कितनी सच्चाई होती है यह जानते हैं।

ब्रेन मैपिंग टेस्ट क्या होता है?

ब्रेन मैपिंग में व्यक्ति के मस्तिष्क पर एक खास तरह का उपकरण लगाया जाता है। उस उपकरण से मस्तिष्क से निकल रहे विद्युत संकेतों को अध्ययन किया जाता है एवं उसे सच्चाई का पता लगाया जाता है।

उस उपकरण के माध्यम से न्यूरोइमेजिंग, इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री, आणविक और ऑप्टोजेनेटिक्स, स्टेम सेल और सेलुलर जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग, न्यूरोफिज़ियोलॉजी और नैनो टेक्नोलॉजी के द्वारा उसके दिमाग में हो रहे हलचल को आसानी से पता लगाया जा सकता है।

इस ब्रेन मैपिंग तकनीक को आसान भाषा में ब्रेन फिंगर तकनीकी भी कहा जाता है इसके द्वारा किए गए टेस्ट में व्यक्ति को ना तो किसी तरह की दवाई और नहीं सुई लगाई जाती है। यह एक वैज्ञानिक तरीका है।

ब्रेन मैपिंग टेस्ट काम कैसे करता है?

इस तकनीक में व्यक्ति को घटना से जुड़े वीडियो और फोटो दिखाई जाती है। यदि उस व्यक्ति ने उसे पहले देखा होगा तो उसके दिमाग में P300 तरंगे पैदा होने लगेगी।

अगर उसने पहले उसे देखा होगा तो व्यक्ति को फोटो देखने के 300 मिली सेकंड बाद ही उसके दिमाग में P300 तरंगे उत्पन्न होने लगती हैं। इसी तरंगे के माध्यम से सचाई का पता लगाया जाता है।

Courtesy- Times of India

ब्रेन मैपिंग तकनीक कितनी सटीक हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, या टेस्ट के द्वारा प्राप्त किए गए नतीजे 99% सटीक होते हैं एवं इसका उपयोग अभी तक ऐसे ही बड़े-बड़े केस में अपराधियों को पकड़ने के लिए किया जा चुका है।

अमेरिका में इस तकनीक का इस्तेमाल से एक निर्दोष को बचाया गया था जो कि 30 साल से किसी और के द्वारा किए गए मर्डर की सजा काट रहा था। इस तकनीक की मदद से असली अपराधी को पकड़ा गया।

भारत में भी इस तकनीक की मदद से कई अपराधी को पकड़ा गया है। जैसे स्टांप पेपर घोटाले में शामिल अबू सलेम और अब्दुल करीम तेलगी को पकड़ने में किया गया था।

वहीं दूसरी बार प्रसिद्ध भाजपा नेता प्रमोद महाजन की मौत के बाद उनके बेटे राहुल महाजन के नशीला पदार्थ लेने का पता लगाया इसी तकनीक के माध्यम से गया था।

ब्रेन मैपिंग तकनीक क्या कानूनी सही है?

किसी भी अपराधी का ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने के लिए पहले कोर्ट के परमिशन के साथ-साथ अपराधियों की भी सहमति लेनी होती है एवं इस टेस्ट को विशेषज्ञों की उपस्थिति में किया जाता है।

भारतीय कानून के मुताबिक किसी भी आरोपी का नारको टेस्ट, पॉलीग्राफ़ टेस्ट या ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराना हो हरेक टेस्ट करवाने से पहले कोर्ट की परमिशन की आवश्यकता पड़ती है।

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